श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.31.25

एकादश स्कन्ध · अध्याय 31 · अथैकत्रिंशोऽध्यायः

स्त्रीबालवृद्धानादाय हतशेषान् धनंजयः।

इन्द्रप्रस्थं समावेश्य वज्रं तत्राभ्यषेचयत्॥ २५

strībālavṛddhānādāya hataśeṣān dhanaṃjayaḥ|

indraprasthaṃ samāveśya vajraṃ tatrābhyaṣecayat|| 25

अर्थ

प्रिय परीक्षित्! पिण्डदानके अनन्तर बची-खुची स्त्रियों, बच्चों और बूढ़ोंको लेकर अर्जुन इन्द्रप्रस्थ आये। वहाँ सबको यथायोग्य बसाकर अनिरुद्धके पुत्र वज्रका राज्याभिषेक कर दिया॥ २५॥✎ 1778

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1778 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: देने-वाला → देनेवाला

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