॥ श्रीहरिः ॥
स्त्रीबालवृद्धानादाय हतशेषान् धनंजयः।
इन्द्रप्रस्थं समावेश्य वज्रं तत्राभ्यषेचयत्॥ २५
strībālavṛddhānādāya hataśeṣān dhanaṃjayaḥ|
indraprasthaṃ samāveśya vajraṃ tatrābhyaṣecayat|| 25
अर्थ
प्रिय परीक्षित्! पिण्डदानके अनन्तर बची-खुची स्त्रियों, बच्चों और बूढ़ोंको लेकर अर्जुन इन्द्रप्रस्थ आये। वहाँ सबको यथायोग्य बसाकर अनिरुद्धके पुत्र वज्रका राज्याभिषेक कर दिया॥ २५॥✎ 1778
स्त्रीबालवृद्धानादाय हतशेषान् धनंजयः।
इन्द्रप्रस्थं समावेश्य वज्रं तत्राभ्यषेचयत्॥ २५
प्रिय परीक्षित्! पिण्डदानके अनन्तर बची-खुची स्त्रियों, बच्चों और बूढ़ोंको लेकर अर्जुन इन्द्रप्रस्थ आये। वहाँ सबको यथायोग्य बसाकर अनिरुद्धके पुत्र वज्रका राज्याभिषेक कर दिया॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.31.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 906) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/31/25/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
- #1778 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: देने-वाला → देनेवाला