श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.4.12

एकादश स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

इति प्रगृणतां तेषां स्त्रियोऽत्यद्भुतदर्शनाः।

दर्शयामास शुश्रूषां स्वर्चिताः कुर्वतीर्विभुः॥ १२

iti pragṛṇatāṃ teṣāṃ striyo'tyadbhutadarśanāḥ|

darśayāmāsa śuśrūṣāṃ svarcitāḥ kurvatīrvibhuḥ|| 12

अर्थ

जब कामदेव, वसन्त आदि देवताओंने इस प्रकार स्तुति की तब सर्वशक्तिमान् भगवान्‌ने अपने योगबलसे उनके सामने बहुत-सी ऐसी रमणियाँ प्रकट करके दिखलायीं, जो अद्भुत रूप-लावण्यसे सम्पन्‍न और विचित्र वस्त्रालंकारोंसे सुसज्जित थीं तथा भगवान्‌की सेवा कर रही थीं॥ १२॥✎ 1728

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1728 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: स्वर्ग-लोककी → स्वर्गलोककी

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