बहुत-सी स्त्रियाँ और शूद्र आदि भगवान्की कथा और उनके नामकीर्तन आदिसे कुछ दूर पड़ गये हैं। वे आप-जैसे भगवद्भक्तोंकी दयाके पात्र हैं। आपलोग उन्हें कथा-कीर्तनकी सुविधा देकर उनका उद्धार करें॥ ४॥✎ 173017311911
दूरेहरिकथाः केचिद् दूरेचाच्युतकीर्तनाः।
स्त्रियः शूद्रादयश्चैव तेऽनुकम्प्या भवादृशाम्॥ ४
बहुत-सी स्त्रियाँ और शूद्र आदि भगवान्की कथा और उनके नामकीर्तन आदिसे कुछ दूर पड़ गये हैं। वे आप-जैसे भगवद्भक्तोंकी दयाके पात्र हैं। आपलोग उन्हें कथा-कीर्तनकी सुविधा देकर उनका उद्धार करें॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.5.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 737) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/5/4/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)