प्रभो! कलियुगमें जो साधुस्वभाव मनुष्य आपकी इन लीलाओंका श्रवण-कीर्तन करेंगे वे सुगमतासे ही इस अज्ञानरूप अन्धकारसे पार हो जायँगे॥ २४॥
यानि ते चरितानीश मनुष्याः साधवः कलौ।
शृण्वन्तः कीर्तयन्तश्च तरिष्यन्त्यञ्जसा तमः॥ २४
प्रभो! कलियुगमें जो साधुस्वभाव मनुष्य आपकी इन लीलाओंका श्रवण-कीर्तन करेंगे वे सुगमतासे ही इस अज्ञानरूप अन्धकारसे पार हो जायँगे॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.6.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 748) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/6/24/