श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.6.25

एकादश स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

यदुवंशेऽवतीर्णस्य भवतः पुरुषोत्तम।

शरच्छतं व्यतीयाय पंचविंशाधिकं प्रभो॥ २५✎ 1894

yaduvaṃśe'vatīrṇasya bhavataḥ puruṣottama|

śaracchataṃ vyatīyāya paṃcaviṃśādhikaṃ prabho|| 25

अर्थ

पुरुषोत्तम सर्वशक्तिमान् प्रभो! आपको यदुवंशमें अवतार ग्रहण किये एक सौ पचीस वर्ष बीत गये हैं॥ २५॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1894 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): व्यतीताय → व्यतीयाय

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