॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.6.29
तदिदं यादवकुलं वीर्यशौर्यश्रियोद्धतम्।
लोकं जिघृक्षद् रुद्धं मे वेलयेव महार्णवः॥ २९
tadidaṃ yādavakulaṃ vīryaśauryaśriyoddhatam|
lokaṃ jighṛkṣad ruddhaṃ me velayeva mahārṇavaḥ|| 29
अर्थ
परन्तु अभी एक काम बाकी है; वह यह कि यदुवंशी बल-विक्रम, वीरता-शूरता और धन-सम्पत्तिसे उन्मत्त हो रहे हैं। ये सारी पृथ्वीको ग्रस लेनेपर तुले हुए हैं। इन्हें मैंने ठीक वैसे ही रोक रखा है, जैसे समुद्रको उसके तटकी भूमि॥ २९॥