श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.7.21

एकादश स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

पुरुषत्वे च मां धीराः सांख्ययोगविशारदाः।

आविस्तरां प्रपश्यन्ति सर्वशक्त्युपबृंहितम्॥ २१

puruṣatve ca māṃ dhīrāḥ sāṃkhyayogaviśāradāḥ|

āvistarāṃ prapaśyanti sarvaśaktyupabṛṃhitam|| 21

अर्थ

सांख्य-योगविशारद धीर पुरुष इस मनुष्ययोनिमें इन्द्रियशक्ति, मनःशक्ति आदिके आश्रयभूत मुझ आत्मतत्त्वको पूर्णतः प्रकटरूपसे साक्षात्कार कर लेते हैं॥ २१॥

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