श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.8.14

एकादश स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

नाधिगच्छेत् स्त्रियं प्राज्ञः कर्हिचिन्मृत्युमात्मनः।

बलाधिकैः स हन्येत गजैरन्यैर्गजो यथा॥ १४

nādhigacchet striyaṃ prājñaḥ karhicinmṛtyumātmanaḥ|

balādhikaiḥ sa hanyeta gajairanyairgajo yathā|| 14

अर्थ

विवेकी पुरुष किसी भी स्त्रीको कभी भी भोग्यरूपसे स्वीकार न करे; क्योंकि यह उसकी मूर्तिमती मृत्यु है। यदि वह स्वीकार करेगा तो हाथियोंसे हाथीकी तरह अधिक बलवान् अन्य पुरुषोंके द्वारा मारा जायगा॥ १४॥

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