श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.9.33

एकादश स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

अवधूतवचः श्रुत्वा पूर्वेषां नः स पूर्वजः।

सर्वसंगविनिर्मुक्तः समचित्तो बभूव ह॥ ३३

avadhūtavacaḥ śrutvā pūrveṣāṃ naḥ sa pūrvajaḥ|

sarvasaṃgavinirmuktaḥ samacitto babhūva ha|| 33

अर्थ

हमारे पूर्वजोंके भी पूर्वज राजा यदु अवधूत दत्तात्रेयकी यह बात सुनकर समस्त आसक्तियोंसे छुटकारा पा गये और समदर्शी हो गये। (इसी प्रकार तुम्हें भी समस्त आसक्तियोंका परित्याग करके समदर्शी हो जाना चाहिये)॥ ३३॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायामेकादशस्कन्धे नवमोऽध्यायः॥ ९॥

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