श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.4.19

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

न तस्य कालावयवैः परिणामादयो गुणाः।

अनाद्यनन्तमव्यक्तं नित्यं कारणमव्ययम्॥ १९

na tasya kālāvayavaiḥ pariṇāmādayo guṇāḥ|

anādyanantamavyaktaṃ nityaṃ kāraṇamavyayam|| 19

अर्थ

वही चराचर जगत‍्का मूल कारण है। वह अव्यक्त, अनादि, अनन्त, नित्य और अविनाशी है। जब वह अपने कार्योंको लीन करके प्रलयके समय साम्यावस्थाको प्राप्त हो जाती है, तब कालके अवयव वर्ष, मास, दिन-रात क्षण आदिके कारण उसमें परिणाम, क्षय, वृद्धि आदि किसी प्रकारके विकार नहीं होते॥ १९॥

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