श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.7.9

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

सर्गोऽस्याथ विसर्गश्‍च वृत्ती रक्षान्तराणि च।

वंशो वंशानुचरितं संस्था हेतुरपाश्रयः॥ ९

sargo'syātha visargaśca vṛttī rakṣāntarāṇi ca|

vaṃśo vaṃśānucaritaṃ saṃsthā heturapāśrayaḥ|| 9

अर्थ

शौनकजी! पुराणोंके पारदर्शी विद्वान् बतलाते हैं कि पुराणोंके दस लक्षण हैं—विश्‍वसर्ग, विसर्ग, वृत्ति, रक्षा, मन्वन्तर, वंश, वंशानुचरित, संस्था (प्रलय), हेतु (ऊति) और अपाश्रय। कोई-कोई आचार्य पुराणोंके पाँच ही लक्षण मानते हैं। दोनों ही बातें ठीक हैं, क्योंकि महापुराणोंमें दस लक्षण होते हैं और छोटे पुराणोंमें पाँच। विस्तार करके दस बतलाते हैं और संक्षेप करके पाँच॥ ९-१०॥

यह अर्थ श्लोक 9–10 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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