varaṃ pratīccha bhadraṃ te varadeśādabhīpsitam|| 3
अर्थ
तुम्हारे इस आजीवन ब्रह्मचर्य-व्रतकी निष्ठा देखकर हम तुमपर बहुत ही प्रसन्न हुए हैं। तुम्हारा कल्याण हो! मैं समस्त वर देनेवालोंका स्वामी हूँ। इसलिये तुम अपना अभीष्ट वर मुझसे माँग लो॥ ३॥✎ 1783
वयं ते परितुष्टाः स्म त्वद्बृहद्व्रतचर्यया।
वरं प्रतीच्छ भद्रं ते वरदेशादभीप्सितम्॥ ३
तुम्हारे इस आजीवन ब्रह्मचर्य-व्रतकी निष्ठा देखकर हम तुमपर बहुत ही प्रसन्न हुए हैं। तुम्हारा कल्याण हो! मैं समस्त वर देनेवालोंका स्वामी हूँ। इसलिये तुम अपना अभीष्ट वर मुझसे माँग लो॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.9.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 953) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/9/3/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)