परीक्षित्! कालका परिमाण, कल्प और उसके अन्तर्गत मन्वन्तरोंका वर्णन आगे चलकर करेंगे। अब तुम पाद्मकल्पका वर्णन सावधान होकर सुनो॥ ४७॥✎ 1821583
परिमाणं च कालस्य कल्पलक्षणविग्रहम्।
यथा पुरस्ताद्व्याख्यास्ये पाद्मं कल्पमथो शृणु॥ ४७
परीक्षित्! कालका परिमाण, कल्प और उसके अन्तर्गत मन्वन्तरोंका वर्णन आगे चलकर करेंगे। अब तुम पाद्मकल्पका वर्णन सावधान होकर सुनो॥ ४७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.10.47 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 233) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/10/47/