श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.10.50

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

ब्रूहि नस्तदिदं सौम्य विदुरस्य विचेष्टितम्।

बन्धुत्यागनिमित्तं च तथैवागतवान् पुनः॥ ५०

brūhi nastadidaṃ saumya vidurasya viceṣṭitam|

bandhutyāganimittaṃ ca tathaivāgatavān punaḥ|| 50

अर्थ

सूतजी! आपका स्वभाव बड़ा सौम्य है। आप विदुरजीका वह चरित्र हमें सुनाइये। उन्होंने अपने भाई-बन्धुओंको क्यों छोड़ा और फिर उनके पास क्यों लौट आये?॥ ५०॥

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