श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.3.19

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

श्‍वविड्वराहोष्ट्रखरैः संस्तुतः पुरुषः पशुः।

न यत्कर्णपथोपेतो जातु नाम गदाग्रजः॥ १९

śvaviḍvarāhoṣṭrakharaiḥ saṃstutaḥ puruṣaḥ paśuḥ|

na yatkarṇapathopeto jātu nāma gadāgrajaḥ|| 19

अर्थ

जिसके कानमें भगवान् श्रीकृष्णकी लीला-कथा कभी नहीं पड़ी, वह नर पशु, कुत्ते, ग्रामसूकर, ऊँट और गधेसे भी गया बीता है॥ १९॥✎ 127 128

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #127 शब्दोंके बीचका स्थान: है।ये → है। ये
  • #128 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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