उन भगवान् वासुदेवकी मैं वन्दना करता हूँ और ध्यान भी, जिनकी दुर्जय मायासे मोहित होकर लोग मुझे जगद्गुरु कहते हैं॥ १२॥✎ 1361581
तस्मै नमो भगवते वासुदेवाय धीमहि।
यन्मायया दुर्जयया मां ब्रुवन्ति जगद्गुरुम्॥ १२
उन भगवान् वासुदेवकी मैं वन्दना करता हूँ और ध्यान भी, जिनकी दुर्जय मायासे मोहित होकर लोग मुझे जगद्गुरु कहते हैं॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.5.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 200) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/5/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)