श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.5.12

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

तस्मै नमो भगवते वासुदेवाय धीमहि।✎ 1864

यन्मायया दुर्जयया मां ब्रुवन्ति जगद‍्गुरुम्॥ १२

tasmai namo bhagavate vāsudevāya dhīmahi|

yanmāyayā durjayayā māṃ bruvanti jagadgurum|| 12

अर्थ

उन भगवान् वासुदेवकी मैं वन्दना करता हूँ और ध्यान भी, जिनकी दुर्जय मायासे मोहित होकर लोग मुझे जगद‍्गुरु कहते हैं॥ १२॥✎ 136 1581

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #136 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से
  • #1581 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: इच्छा-नुसार → इच्छानुसार
  • #1864 अक्षर (एक स्थानपर, प्रमाणसहित): भगवत़े → भगवते

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