यह माया तो उनकी आँखोंके सामने ठहरती ही नहीं, झेंपकर दूरसे ही भाग जाती है। परन्तु संसारके अज्ञानीजन उसीसे मोहित होकर ‘यह मैं हूँ, यह मेरा है’ इस प्रकार बकते रहते हैं॥ १३॥✎ 1361581
विलज्जमानया यस्य स्थातुमीक्षापथेऽमुया।
विमोहिता विकत्थन्ते ममाहमिति दुर्धियः॥ १३
यह माया तो उनकी आँखोंके सामने ठहरती ही नहीं, झेंपकर दूरसे ही भाग जाती है। परन्तु संसारके अज्ञानीजन उसीसे मोहित होकर ‘यह मैं हूँ, यह मेरा है’ इस प्रकार बकते रहते हैं॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.5.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 200) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/5/13/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)