भगवत्स्वरूप नारद! द्रव्य, कर्म, काल, स्वभाव और जीव—वास्तवमें भगवान्से भिन्न दूसरी कोई भी वस्तु नहीं है॥ १४॥✎ 1361581
द्रव्यं कर्म च कालश्च स्वभावो जीव एव च।
वासुदेवात्परो ब्रह्मन्न चान्योऽर्थोऽस्ति तत्त्वतः॥ १४
भगवत्स्वरूप नारद! द्रव्य, कर्म, काल, स्वभाव और जीव—वास्तवमें भगवान्से भिन्न दूसरी कोई भी वस्तु नहीं है॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.5.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 200) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/5/14/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)