तेजके विकारसे जलकी उत्पत्ति हुई। इसका गुण है रस; कारण-तत्त्वोंके गुण शब्द, स्पर्श और रूप भी इसमें हैं॥ २८॥✎ 137138
तेजसस्तु विकुर्वाणादासीदम्भो रसात्मकम्।
रूपवत् स्पर्शवच्चाम्भो घोषवच्च परान्वयात्॥ २८
तेजके विकारसे जलकी उत्पत्ति हुई। इसका गुण है रस; कारण-तत्त्वोंके गुण शब्द, स्पर्श और रूप भी इसमें हैं॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.5.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 201) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/5/28/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)