श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.7.9

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

यद्वेनमुत्पथगतं द्विजवाक्यवज्र-

विप्लुष्टपौरुषभगं निरये पतन्तम्।

त्रात्वार्थितो जगति पुत्रपदं च लेभे

दुग्धा वसूनि वसुधा सकलानि येन॥ ९

yadvenamutpathagataṃ dvijavākyavajra-

vipluṣṭapauruṣabhagaṃ niraye patantam|

trātvārthito jagati putrapadaṃ ca lebhe

dugdhā vasūni vasudhā sakalāni yena|| 9

अर्थ

कुमार्गगामी वेनका ऐश्‍वर्य और पौरुष ब्राह्मणोंके हुंकाररूपी वज्रसे जलकर भस्म हो गया। वह नरकमें गिरने लगा। ऋषियोंकी प्रार्थनापर भगवान्‌ने उसके शरीरमन्थनसे पृथुके रूपमें अवतार धारण कर उसे नरकोंसे उबारा और इस प्रकार ‘पुत्र’* शब्दको चरितार्थ किया। उसी अवतारमें पृथ्वीको गाय बनाकर उन्होंने उससे जगत‍्के लिये समस्त ओषधियोंका दोहन किया॥ ९॥✎ 149

टिप्पणियाँ

  1. *

    ‘पुत्र’ शब्दका अर्थ ही है ‘पुत्’ नामक नरकसे रक्षा करनेवाला।

    (मुद्रित पृष्ठ 210)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #149 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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