श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.8.16

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

प्रमाणमण्डकोशस्य बाह्याभ्य१न्तरभेदतः।

महतां चा२नुचरितं वर्णाश्रमविनिश्‍चयः॥ १६

pramāṇamaṇḍakośasya bāhyābhyantarabhedataḥ|

mahatāṃ cānucaritaṃ varṇāśramaviniścayaḥ|| 16

अर्थ

ब्रह्माण्डका परिमाण भीतर और बाहर—दोनों प्रकारसे बतलाइये। साथ ही महापुरुषोंके चरित्र, वर्णाश्रमके भेद और उनके धर्मका निरूपण कीजिये॥ १६॥✎ 167 168

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—भ्यन्तरवस्तुनः।

    (मुद्रित पृष्ठ 220)
  2. २

    प्रा० पा०—चारु चरितं।

    (मुद्रित पृष्ठ 220)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #167 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #168 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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