श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.8.17

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

युगानि युगमानं च धर्मो यश्‍च युगे युगे।

अवतारानुचरितं यदाश्‍चर्यत३मं हरेः॥ १७

yugāni yugamānaṃ ca dharmo yaśca yuge yuge|

avatārānucaritaṃ yadāścaryatamaṃ hareḥ|| 17

अर्थ

युगोंके भेद, उनके परिमाण और उनके अलग-अलग धर्म तथा भगवान्‌के विभिन्‍न अवतारोंके परम आश्‍चर्यमय चरित्र भी बतलाइये॥ १७॥✎ 167 168

टिप्पणियाँ

  1. ३

    प्रा० पा०—मयं।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 220)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #167 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #168 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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