श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.8.4

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

शृण्वतः श्रद्धया नित्यं गृणतश्‍च स्वचेष्टितम्।

कालेन नातिदीर्घेण भगवान् विशते हृदि॥ ४

śṛṇvataḥ śraddhayā nityaṃ gṛṇataśca svaceṣṭitam|

kālena nātidīrgheṇa bhagavān viśate hṛdi|| 4

अर्थ

जो लोग उनकी लीलाओंका श्रद्धाके साथ नित्य श्रवण और कथन करते हैं, उनके हृदयमें थोड़े ही समयमें भगवान् प्रकट हो जाते हैं॥ ४॥

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