श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.8.7

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

यदधातुमतो ब्रह्मन् देहारम्भोऽस्य धातुभिः।

यदृच्छया हेतुना वा भवन्तो जानते यथा॥ ७

yadadhātumato brahman dehārambho'sya dhātubhiḥ|

yadṛcchayā hetunā vā bhavanto jānate yathā|| 7

अर्थ

भगवन्! जीवका पंचभूतोंके साथ कोई सम्बन्ध नहीं है। फिर भी इसका शरीर पंचभूतोंसे ही बनता है। तो क्या स्वभावसे ही ऐसा होता है, अथवा किसी कारणवश—आप इस बातका मर्म पूर्णरीतिसे जानते हैं॥ ७॥✎ 166

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #166 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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