॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 2.9.11
श्यामावदाताः शतपत्रलोचनाः
पिशङ्गवस्त्राः सुरुचः सुपेशसः।
सर्वे चतुर्बाहव उन्मिषन्मणि-
प्रवेकनिष्काभरणाः सुवर्चसः।
प्रवालवैदूर्यमृणालवर्चसः
परिस्फुरत्कुण्डलमौलिमालिनः ॥ ११
śyāmāvadātāḥ śatapatralocanāḥ
piśaṅgavastrāḥ surucaḥ supeśasaḥ|
sarve caturbāhava unmiṣanmaṇi-
pravekaniṣkābharaṇāḥ suvarcasaḥ|
pravālavaidūryamṛṇālavarcasaḥ
parisphuratkuṇḍalamaulimālinaḥ || 11
अर्थ
उनका उज्ज्वल आभासे युक्त श्याम शरीर शतदल कमलके समान कोमल नेत्र और पीले रंगके वस्त्रसे शोभायमान है। अंग-अंगसे राशि-राशि सौन्दर्य बिखरता रहता है। वे कोमलताकी मूर्ति हैं। सभीके चार-चार भुजाएँ हैं। वे स्वयं तो अत्यन्त तेजस्वी हैं ही, मणिजटित सुवर्णके प्रभामय आभूषण भी धारण किये रहते हैं। उनकी छबि मूँगे, वैदूर्यमणि और कमलके उज्ज्वल तन्तुके समान है। उनके कानोंमें कुण्डल, मस्तकपर मुकुट और कण्ठमें मालाएँ शोभायमान हैं॥ ११॥✎ 173