श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.9.12

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

भ्राजिष्णुभिर्यः परितो विराजते

लसद्विमानावलिभिर्महात्मनाम् ।

विद्योतमानः प्रमदोत्तमाद्युभिः

सविद्युदभ्रावलिभिर्यथा नभः॥ १२

bhrājiṣṇubhiryaḥ parito virājate

lasadvimānāvalibhirmahātmanām |

vidyotamānaḥ pramadottamādyubhiḥ

savidyudabhrāvalibhiryathā nabhaḥ|| 12

अर्थ

जिस प्रकार आकाश बिजलीसहित बादलोंसे शोभायमान होता है, वैसे ही वह लोक मनोहर कामिनियोंकी कान्तिसे युक्त महात्माओंके दिव्य तेजोमय विमानोंसे स्थान-स्थानपर सुशोभित होता रहता है॥ १२॥✎ 173

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #173 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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