जिस प्रकार आकाश बिजलीसहित बादलोंसे शोभायमान होता है, वैसे ही वह लोक मनोहर कामिनियोंकी कान्तिसे युक्त महात्माओंके दिव्य तेजोमय विमानोंसे स्थान-स्थानपर सुशोभित होता रहता है॥ १२॥✎ 173
भ्राजिष्णुभिर्यः परितो विराजते
लसद्विमानावलिभिर्महात्मनाम् ।
विद्योतमानः प्रमदोत्तमाद्युभिः
सविद्युदभ्रावलिभिर्यथा नभः॥ १२
जिस प्रकार आकाश बिजलीसहित बादलोंसे शोभायमान होता है, वैसे ही वह लोक मनोहर कामिनियोंकी कान्तिसे युक्त महात्माओंके दिव्य तेजोमय विमानोंसे स्थान-स्थानपर सुशोभित होता रहता है॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.9.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 223) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/9/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)