bibharmi tapasā viśvaṃ vīryaṃ me duścaraṃ tapaḥ|| 23
अर्थ
मैं तपस्यासे ही इस संसारकी सृष्टि करता हूँ, तपस्यासे ही इसका धारण-पोषण करता हूँ और फिर तपस्यासे ही इसे अपनेमें लीन कर लेता हूँ। तपस्या मेरी एक दुर्लङ्घ्य शक्ति है॥ २३॥
सृजामि तपसैवेदं ग्रसामि तपसा पुनः।
बिभर्मि तपसा विश्वं वीर्यं मे दुश्चरं तपः॥ २३
मैं तपस्यासे ही इस संसारकी सृष्टि करता हूँ, तपस्यासे ही इसका धारण-पोषण करता हूँ और फिर तपस्यासे ही इसे अपनेमें लीन कर लेता हूँ। तपस्या मेरी एक दुर्लङ्घ्य शक्ति है॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.9.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 225) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/9/23/