आप मुझपर ऐसी कृपा कीजिये कि मैं सजग रहकर सावधानीसे आपकी आज्ञाका पालन कर सकूँ और सृष्टिकी रचना करते समय भी कर्तापन आदिके अभिमानसे बँध न जाऊँ॥ २८॥
भगवच्छिक्षितमहं करवाणि ह्यतन्द्रितः।
नेहमानः प्रजासर्गं बध्येयं यदनुग्रहात्॥ २८
आप मुझपर ऐसी कृपा कीजिये कि मैं सजग रहकर सावधानीसे आपकी आज्ञाका पालन कर सकूँ और सृष्टिकी रचना करते समय भी कर्तापन आदिके अभिमानसे बँध न जाऊँ॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.9.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 225) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/9/28/