श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.9.28

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

भगवच्छिक्षितमहं करवाणि ह्यतन्द्रितः।

नेहमानः प्रजासर्गं बध्येयं यदनुग्रहात्॥ २८

bhagavacchikṣitamahaṃ karavāṇi hyatandritaḥ|

nehamānaḥ prajāsargaṃ badhyeyaṃ yadanugrahāt|| 28

अर्थ

आप मुझपर ऐसी कृपा कीजिये कि मैं सजग रहकर सावधानीसे आपकी आज्ञाका पालन कर सकूँ और सृष्टिकी रचना करते समय भी कर्तापन आदिके अभिमानसे बँध न जाऊँ॥ २८॥

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