श्रीभगवान्ने कहा—अनुभव, प्रेमाभक्ति और साधनोंसे युक्त अत्यन्त गोपनीय अपने स्वरूपका ज्ञान मैं तुम्हें कहता हूँ; तुम उसे ग्रहण करो॥ ३०॥✎ 175
ज्ञानं परमगुह्यं मे यद् विज्ञानसमन्वितम्।
सरहस्यं तदङ्गं च गृहाण गदितं मया॥ ३०
श्रीभगवान्ने कहा—अनुभव, प्रेमाभक्ति और साधनोंसे युक्त अत्यन्त गोपनीय अपने स्वरूपका ज्ञान मैं तुम्हें कहता हूँ; तुम उसे ग्रहण करो॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.9.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 226) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/9/30/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#175 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने