परीक्षित्! जिस समय मेरे परमतेजस्वी पिता सरस्वतीके तटपर बैठकर परमात्माके ध्यानमें मग्न थे, उस समय देवर्षि नारदजीने वही भागवत उन्हें सुनाया॥ ४४॥✎ 176177178179
नारदः प्राह मुनये सरस्वत्यास्तटे नृप।
ध्यायते ब्रह्म परमं व्यासायामिततेजसे॥ ४४
परीक्षित्! जिस समय मेरे परमतेजस्वी पिता सरस्वतीके तटपर बैठकर परमात्माके ध्यानमें मग्न थे, उस समय देवर्षि नारदजीने वही भागवत उन्हें सुनाया॥ ४४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.9.44 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 227) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/9/44/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (4)