तुमने मुझसे जो यह प्रश्न किया है कि विराट्पुरुषसे इस जगत्की उत्पत्ति कैसे हुई तथा दूसरे भी जो बहुत-से प्रश्न किये हैं, उन सबका उत्तर मैं उसी भागवतपुराणके रूपमें देता हूँ॥ ४५॥✎ 176177178179
यदुताहं त्वया पृष्टो वैराजात् पुरुषादिदम्।
यथाऽऽसीत्तदुपाख्यास्ये प्रश्नानन्यांश्च कृत्स्नशः॥ ४५
तुमने मुझसे जो यह प्रश्न किया है कि विराट्पुरुषसे इस जगत्की उत्पत्ति कैसे हुई तथा दूसरे भी जो बहुत-से प्रश्न किये हैं, उन सबका उत्तर मैं उसी भागवतपुराणके रूपमें देता हूँ॥ ४५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.9.45 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 227) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/9/45/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (4)