गदाको अपनी ओर आते देखकर भगवान्ने, जहाँ खड़े थे वहींसे, उसे आते ही अनायास इस प्रकार पकड़ लिया, जैसे गरुड साँपिनको पकड़ ले॥ ११॥✎ 282283284
तां स आपततीं वीक्ष्य भगवान् समवस्थितः।
जग्राह लीलया प्राप्तां गरुत्मानिव पन्नगीम्॥ ११
गदाको अपनी ओर आते देखकर भगवान्ने, जहाँ खड़े थे वहींसे, उसे आते ही अनायास इस प्रकार पकड़ लिया, जैसे गरुड साँपिनको पकड़ ले॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.19.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 325) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/19/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
#282 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने, → भगवान्ने,
#283 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीवराहभगवान् ने → श्रीवराहभगवान्ने