श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.19.12

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

स्वपौरुषे प्रतिहते हतमानो महासुरः।

नैच्छद्गदां दीयमानां हरिणा विगतप्रभः॥ १२

svapauruṣe pratihate hatamāno mahāsuraḥ|

naicchadgadāṃ dīyamānāṃ hariṇā vigataprabhaḥ|| 12

अर्थ

अपने उद्यमको इस प्रकार व्यर्थ हुआ देख उस महादैत्यका घमंड ठंडा पड़ गया और उसका तेज नष्ट हो गया। अबकी बार भगवान्‌के देनेपर उसने उस गदाको लेना न चाहा॥ १२॥✎ 285

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #285 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें