॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.22.10
यदा तु भवतः शीलश्रुतरूपवयोगुणान्।
अशृणोन्नारदादेषा त्वय्यासीत्कृतनिश्चया॥ १०✎ 1884
yadā tu bhavataḥ śīlaśrutarūpavayoguṇān|
aśṛṇonnāradādeṣā tvayyāsītkṛtaniścayā|| 10
अर्थ
जबसे इसने नारदजीके मुखसे आपके शील, विद्या, रूप, आयु और गुणोंका वर्णन सुना है तभीसे यह आपको अपना पति बनानेका निश्चय कर चुकी है॥ १०॥