कोमलता, कठोरता, शीतलता और उष्णता तथा वायुका सूक्ष्म रूप होना—ये स्पर्शके लक्षण हैं॥ ३६॥✎ 321
मृदुत्वं कठिनत्वं च शैत्यमुष्णत्वमेव च।
एतत्स्पर्शस्य स्पर्शत्वं तन्मात्रत्वं नभस्वतः॥ ३६
कोमलता, कठोरता, शीतलता और उष्णता तथा वायुका सूक्ष्म रूप होना—ये स्पर्शके लक्षण हैं॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.26.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 365) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/26/36/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)