जो भेददर्शी क्रोधी पुरुष हृदयमें हिंसा, दम्भ अथवा मात्सर्यका भाव रखकर मुझसे प्रेम करता है, वह मेरा तामस भक्त है॥ ८॥✎ 334
अभिसन्धाय यो हिंसां दम्भं मात्सर्यमेव वा।
संरम्भी भिन्नदृग्भावं मयि कुर्यात्स तामसः॥ ८
जो भेददर्शी क्रोधी पुरुष हृदयमें हिंसा, दम्भ अथवा मात्सर्यका भाव रखकर मुझसे प्रेम करता है, वह मेरा तामस भक्त है॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.29.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 380) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/29/8/
टिप्पणियाँ
२
प्रा० पा०—च।
(मुद्रित पृष्ठ 380)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#334 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने