कर्मशक्तिको जाग्रत् करनेवाले कालके द्वारा विष्णुभगवान्की नाभिसे प्रकट हुआ वह सूक्ष्मतत्त्व कमलकोशके रूपमें सहसा ऊपर उठा और उसने सूर्यके समान अपने तेजसे उस अपार जलराशिको देदीप्यमान कर दिया॥ १४॥✎ 235236
स पद्मकोशः सहसोदतिष्ठत्
कालेन कर्मप्रतिबोधनेन।
स्वरोचिषा तत्सलिलं विशालं
विद्योतयन्नर्क इवात्मयोनिः॥ १४
कर्मशक्तिको जाग्रत् करनेवाले कालके द्वारा विष्णुभगवान्की नाभिसे प्रकट हुआ वह सूक्ष्मतत्त्व कमलकोशके रूपमें सहसा ऊपर उठा और उसने सूर्यके समान अपने तेजसे उस अपार जलराशिको देदीप्यमान कर दिया॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.8.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 269) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/8/14/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#235 शब्दोंके बीचका स्थान: विष्णुभगवान् की → विष्णुभगवान्की