श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.8.15

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

तल्लोकपद्मं स उ एव विष्णुः

प्रावीविशत्सर्वगुणावभासम् ।

तस्मिन् स्वयं वेदमयो विधाता

स्वयम्भुवं यं स्म वदन्ति सोऽभूत्॥ १५

tallokapadmaṃ sa u eva viṣṇuḥ

prāvīviśatsarvaguṇāvabhāsam |

tasmin svayaṃ vedamayo vidhātā

svayambhuvaṃ yaṃ sma vadanti so'bhūt|| 15

अर्थ

सम्पूर्ण गुणोंको प्रकाशित करनेवाले उस सर्वलोकमय कमलमें वे विष्णुभगवान् ही अन्तर्यामीरूपसे प्रविष्ट हो गये। तब उसमेंसे बिना पढ़ाये ही स्वयं सम्पूर्ण वेदोंको जाननेवाले साक्षात् वेदमूर्ति श्रीब्रह्माजी प्रकट हुए, जिन्हें लोग स्वयम्भू कहते हैं॥ १५॥✎ 235 236

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #235 शब्दोंके बीचका स्थान: विष्णुभगवान् की → विष्णुभगवान्‌की
  • #236 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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