श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.8.32

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

तर्ह्येव तन्‍नाभिसरःसरोज-

मात्मानमम्भः श्‍वसनं वियच्च।

ददर्श देवो जगतो विधाता

नातः परं लोकविसर्गदृष्टिः॥ ३२

tarhyeva tannābhisaraḥsaroja-

mātmānamambhaḥ śvasanaṃ viyacca|

dadarśa devo jagato vidhātā

nātaḥ paraṃ lokavisargadṛṣṭiḥ|| 32

अर्थ

तब विश्‍वरचनाकी इच्छावाले लोकविधाता ब्रह्माजीने भगवान्‌के नाभिसरोवरसे प्रकट हुआ वह कमल, जल, आकाश, वायु और अपना शरीर—केवल ये पाँच ही पदार्थ देखे, इनके सिवा और कुछ उन्हें दिखायी न दिया॥ ३२॥

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