॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.8.32
तर्ह्येव तन्नाभिसरःसरोज-
मात्मानमम्भः श्वसनं वियच्च।
ददर्श देवो जगतो विधाता
नातः परं लोकविसर्गदृष्टिः॥ ३२
tarhyeva tannābhisaraḥsaroja-
mātmānamambhaḥ śvasanaṃ viyacca|
dadarśa devo jagato vidhātā
nātaḥ paraṃ lokavisargadṛṣṭiḥ|| 32
अर्थ
तब विश्वरचनाकी इच्छावाले लोकविधाता ब्रह्माजीने भगवान्के नाभिसरोवरसे प्रकट हुआ वह कमल, जल, आकाश, वायु और अपना शरीर—केवल ये पाँच ही पदार्थ देखे, इनके सिवा और कुछ उन्हें दिखायी न दिया॥ ३२॥