श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.1.16

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

विदुर उवाच

अत्रेर्गृहे सुरश्रेष्ठाः स्थित्युत्पत्त्यन्तहेतवः।

किञ्चिच्चिकीर्षवो जाता एतदाख्याहि मे गुरो॥ १६

atrergṛhe suraśreṣṭhāḥ sthityutpattyantahetavaḥ|

kiñciccikīrṣavo jātā etadākhyāhi me guro|| 16

अर्थ

विदुरजीने पूछा—गुरुजी! कृपया यह बतलाइये कि जगत‍्की उत्पत्ति, स्थिति और अन्त करनेवाले इन सर्वश्रेष्ठ देवोंने अत्रि मुनिके यहाँ क्या करनेकी इच्छासे अवतार लिया था?॥ १६॥

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