saha patnyā yayāvṛkṣaṃ kulādriṃ tapasi sthitaḥ|| 17
अर्थ
श्रीमैत्रेयजीने कहा—जब ब्रह्माजीने ब्रह्मज्ञानियोंमें श्रेष्ठ महर्षि अत्रिको सृष्टि रचनेके लिये आज्ञा दी, तब वे अपनी सहधर्मिणीके सहित तप करनेके लिये ऋक्षनामक कुलपर्वतपर गये॥ १७॥
ब्रह्मणा नोदितः सृष्टावत्रिर्ब्रह्मविदां वरः।
सह पत्न्या ययावृक्षं कुलाद्रिं तपसि स्थितः॥ १७
श्रीमैत्रेयजीने कहा—जब ब्रह्माजीने ब्रह्मज्ञानियोंमें श्रेष्ठ महर्षि अत्रिको सृष्टि रचनेके लिये आज्ञा दी, तब वे अपनी सहधर्मिणीके सहित तप करनेके लिये ऋक्षनामक कुलपर्वतपर गये॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.1.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 406) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/1/17/