श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.1.32

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

एवं कामवरं दत्त्वा प्रतिजग्मुः सुरेश्‍वराः।

सभाजितास्तयोः सम्यग्दम्पत्योर्मिषतोस्ततः॥ ३२

evaṃ kāmavaraṃ dattvā pratijagmuḥ sureśvarāḥ|

sabhājitāstayoḥ samyagdampatyormiṣatostataḥ|| 32

अर्थ

उन्हें इस प्रकार अभीष्ट वर देकर तथा पति-पत्नी दोनोंसे भलीभाँति पूजित होकर उनके देखते-ही-देखते वे तीनों सुरेश्‍वर अपने-अपने लोकोंको चले गये॥ ३२॥

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