bhavitāro'ṅga bhadraṃ te visrapsyanti ca te yaśaḥ|| 31
अर्थ
प्रिय महर्षे! तुम्हारा कल्याण हो, तुम्हारे यहाँ हमारे ही अंशस्वरूप तीन जगद्विख्यात पुत्र उत्पन्न होंगे और तुम्हारे सुन्दर यशका विस्तार करेंगे॥ ३१॥
अथास्मदंशभूतास्ते आत्मजा लोकविश्रुताः।
भवितारोऽङ्ग भद्रं ते विस्रप्स्यन्ति च ते यशः॥ ३१
प्रिय महर्षे! तुम्हारा कल्याण हो, तुम्हारे यहाँ हमारे ही अंशस्वरूप तीन जगद्विख्यात पुत्र उत्पन्न होंगे और तुम्हारे सुन्दर यशका विस्तार करेंगे॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.1.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 408) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/1/31/