॥ श्रीहरिः ॥
क्षणेनाच्छादितं व्योम घनानीकेन सर्वतः।
विस्फुरत्तडिता दिक्षु त्रासयत्स्तनयित्नुना॥ २३
kṣaṇenācchāditaṃ vyoma ghanānīkena sarvataḥ|
visphurattaḍitā dikṣu trāsayatstanayitnunā|| 23
अर्थ
एक क्षणमें ही सारा आकाश मेघमालासे घिर गया। सब ओर भयंकर गड़गड़ाहटके साथ बिजली चमकने लगी॥ २३॥
क्षणेनाच्छादितं व्योम घनानीकेन सर्वतः।
विस्फुरत्तडिता दिक्षु त्रासयत्स्तनयित्नुना॥ २३
एक क्षणमें ही सारा आकाश मेघमालासे घिर गया। सब ओर भयंकर गड़गड़ाहटके साथ बिजली चमकने लगी॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.10.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 463) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/10/23/