बेटा ध्रुव! देहादिके रूपमें परिणत हुए पंचभूतोंसे स्त्री-पुरुषका आविर्भाव होता है और फिर उनके पारस्परिक समागमसे दूसरे स्त्री-पुरुष उत्पन्न होते हैं॥ १५॥✎ 379380
भूतैः पंचभिरारब्धैर्योषित्पुरुष एव हि।
तयोर्व्यवायात्सम्भूतिर्योषित्पुरुषयोरिह ॥ १५
बेटा ध्रुव! देहादिके रूपमें परिणत हुए पंचभूतोंसे स्त्री-पुरुषका आविर्भाव होता है और फिर उनके पारस्परिक समागमसे दूसरे स्त्री-पुरुष उत्पन्न होते हैं॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.11.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 465) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/11/15/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)