श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.11.33

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

हेलनं गिरिशभ्रातुर्धनदस्य त्वया कृतम्।

यज्जघ्निवान् पुण्यजनान् भ्रातृघ्नानित्यमर्षितः॥ ३३

helanaṃ giriśabhrāturdhanadasya tvayā kṛtam|

yajjaghnivān puṇyajanān bhrātṛghnānityamarṣitaḥ|| 33

अर्थ

तुमने जो यह समझकर कि ये मेरे भाईके मारनेवाले हैं, इतने यक्षोंका संहार किया है, इससे तुम्हारे द्वारा भगवान् शंकरके सखा कुबेरजीका बड़ा अपराध हुआ है॥ ३३॥

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