श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.12.13

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

षट्त्रिंशद्वर्षसाहस्रं शशास क्षितिमण्डलम्।

भोगैः पुण्यक्षयं कुर्वन्‍नभोगैरशुभक्षयम्॥ १३

ṣaṭtriṃśadvarṣasāhasraṃ śaśāsa kṣitimaṇḍalam|

bhogaiḥ puṇyakṣayaṃ kurvannabhogairaśubhakṣayam|| 13

अर्थ

इस प्रकार तरह-तरहके ऐश्‍वर्यभोगसे पुण्यका और भोगोंके त्यागपूर्वक यज्ञादि कर्मोंके अनुष्ठानसे पापका क्षय करते हुए उन्होंने छत्तीस हजार वर्षतक पृथ्वीका शासन किया॥ १३॥

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