श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.12.14

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

एवं बहुसवं कालं महात्माविचलेन्द्रियः।

त्रिवर्गौपयिकं नीत्वा पुत्रायादान्‍नृपासनम्॥ १४

evaṃ bahusavaṃ kālaṃ mahātmāvicalendriyaḥ|

trivargaupayikaṃ nītvā putrāyādānnṛpāsanam|| 14

अर्थ

जितेन्द्रिय महात्मा ध्रुवने इसी तरह अर्थ, धर्म और कामके सम्पादनमें बहुत-से वर्ष बिताकर अपने पुत्र उत्कलको राजसिंहासन सौंप दिया॥ १४॥

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