सुनन्द और नन्द कहने लगे—राजन्! आपका कल्याण हो, आप सावधान होकर हमारी बात सुनिये। आपने पाँच वर्षकी अवस्थामें ही तपस्या करके सर्वेश्वर भगवान्को प्रसन्न कर लिया था॥ २३॥✎ 3821326
भो भो राजन् सुभद्रं ते वाचं नोऽवहितः शृणु।
यः पंचवर्षस्तपसा भवान्देवमतीतृपत्॥ २३
सुनन्द और नन्द कहने लगे—राजन्! आपका कल्याण हो, आप सावधान होकर हमारी बात सुनिये। आपने पाँच वर्षकी अवस्थामें ही तपस्या करके सर्वेश्वर भगवान्को प्रसन्न कर लिया था॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.12.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 470) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/12/23/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)