श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.12.40

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

महिमानं विलोक्यास्य नारदो भगवानृषिः।

आतोद्यं वितुदन् श्लोकान् सत्रेऽगायत्प्रचेतसाम्॥ ४०

mahimānaṃ vilokyāsya nārado bhagavānṛṣiḥ|

ātodyaṃ vitudan ślokān satre'gāyatpracetasām|| 40

अर्थ

उसकी महिमा देखकर देवर्षि नारदने प्रचेताओंकी यज्ञशालामें वीणा बजाकर ये तीन श्लोक गाये थे॥ ४०॥

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